
संसद के बजट सत्र के तीसरे दिन प्रयागराज Kumbh में हुई भगदड़ का मुद्दा जोरशोर से उठा। इस विषय पर विपक्षी सांसदों ने दोनों सदनों में चर्चा की मांग की।
विपक्ष ने मांग की कि मौनी अमावस्या के दिन हुई भगदड़ में मरने वालों का ‘सटीक’ आंकड़ा सार्वजनिक किया जाए। इस मुद्दे पर विपक्षी सांसदों ने नारेबाजी की और प्रतीकात्मक रूप से सदन का बहिष्कार भी किया।
राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा की शुरुआत करते हुए कांग्रेस सांसद मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, अपनी बात शुरू करने से पहले, मैं महाकुंभ में दिवंगत लोगों को श्रद्धांजलि देता हूं, जिन्होंने हज़ारों की संख्या में अपनी जान गंवाई।
खड़गे के इस बयान पर सत्ता पक्ष के सांसदों ने जोरदार विरोध किया और हंगामा शुरू हो गया।
इस पर खड़गे ने सफाई देते हुए कहा, यह मेरा अंदाज है। यदि यह गलत है तो आप बताइए। अगर यह सच नहीं है तो सही आंकड़ा प्रस्तुत करें।
क्या हुआ राज्यसभा में?

राज्यसभा में कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे के बयान पर सभापति जगदीप धनखड़ ने प्रतिक्रिया देते हुए उनसे अपना बयान वापस लेने की अपील की।
उन्होंने कहा, विपक्ष के नेता ने हज़ारों की संख्या में मौतों का आंकड़ा दिया है। मैं उनसे अपील करता हूं कि सदन में कही गई हर बात का विशेष महत्व होता है। आपने जो कहा है, उससे सभी चौंक गए हैं। यहां से जो संदेश जाता है, भले ही उसका खंडन किया जाए, वह पूरी दुनिया में फैलता है।
इस मुद्दे पर विपक्षी सांसदों ने राज्यसभा में चर्चा की मांग की और विरोध स्वरूप कुछ देर के लिए सदन से वाकआउट कर दिया। सदन के बाहर भी कई विपक्षी नेताओं ने सरकार पर सवाल उठाए।
ये भी पढ़े- अमेरिकी सेना के हेलीकॉप्टर की हवा में एक अमेरिकन Airlines के विमान से टक्कर, जिसमें सवार सभी यात्रियों के मारे जाने की ख़बर।विपक्षी सांसदों ने प्रयागराज में चल रहे Kumbh मेले में कथित वीआईपी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए और आरोप लगाया कि आम श्रद्धालुओं की सुविधाओं की अनदेखी की जा रही है।
समाजवादी पार्टी की राज्यसभा सांसद जया बच्चन ने सदन से बाहर पत्रकारों से बातचीत में कहा, राज्यसभा में जलशक्ति मंत्रालय से जुड़े प्रश्न उठाए गए, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इस वक्त सबसे ज्यादा दूषित पानी Kumbh क्षेत्र में है। लाशें जो पानी में बहा दी गईं, उनके कारण पानी प्रदूषित हो गया है, लेकिन सरकार इस पर कोई सफाई नहीं दे रही है।
तृणमूल कांग्रेस की सागरिका घोष ने भी सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा, हम Kumbh मेले में हुई भगदड़ का सच जानना चाहते हैं। खोजी पत्रकारों की रिपोर्ट्स बता रही हैं कि वहां केवल 30 नहीं, बल्कि इससे कहीं अधिक मौतें हुई हैं। हमने नियम 267 के तहत इस मुद्दे पर चर्चा की मांग की है, लेकिन सरकार मौतों का सही आंकड़ा क्यों नहीं बता रही? यह एक गंभीर अपराध है।
राष्ट्रीय जनता दल के सांसद मनोज झा ने भी सरकार की जवाबदेही पर सवाल उठाए। संसद परिसर में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा, यह केवल हमारी चिंता नहीं है, बल्कि पूरा देश अपने लापता परिजनों को ढूंढ रहा है। Kumbh पहले भी होता रहा है और आगे भी होगा, लेकिन सरकार की चुप्पी चिंता बढ़ा रही है।
उन्होंने आगे कहा, लोग जवाबदेही चाहते हैं। इतने लोगों की जान चली गई और सरकार सदन को अंधेरे में रखना चाहती है। यह देश को अंधेरे में रखने की कोशिश है। हमने इसी वजह से सांकेतिक रूप से वाकआउट किया, ताकि सरकार कम से कम मृतकों को सम्मान दे।
Kumbh में भगदड़ पर लोकसभा में चर्चा की मांग

सोमवार को लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने उत्तर प्रदेश सरकार के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।
प्रश्नकाल के दौरान विपक्षी सांसद Kumbh हादसे पर चर्चा की मांग कर रहे थे, लेकिन लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने इसकी अनुमति नहीं दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रश्नकाल के दौरान किसी अन्य विषय पर चर्चा नहीं हो सकती।
स्पीकर की बात के बावजूद विपक्षी सांसदों ने नारेबाजी जारी रखी और Kumbh में मारे गए लोगों का सही आंकड़ा सार्वजनिक करने की मांग करते रहे।
ये भी पढ़े- Ayodhya में दलित युवती की हत्या: पुलिस और परिवार के अलग-अलग दावेहंगामे के बीच ओम बिरला ने नाराजगी जाहिर करते हुए सांसदों से कहा, आपको जनता ने यहां सवाल पूछने के लिए भेजा है, मेज तोड़ने के लिए नहीं। अगर मेज ही तोड़नी है तो और जोर से मारिए।
विपक्षी सदस्य लगातार Kumbh हादसे को लेकर सदन में आवाज उठाते रहे। इसी दौरान संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्षी सांसदों के व्यवहार पर सवाल उठाए।
लोकसभा के बाहर कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने मीडिया से बात करते हुए कहा, हमने महाकुंभ को लेकर विशेष चर्चा की मांग रखी थी, लेकिन सरकार ने इसे पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया।
उन्होंने आगे कहा, लोग न्याय की मांग कर रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी आवाज दबा रही है। जिस तरह सरकार Kumbh में हुई मौतों के आंकड़े छुपाने की कोशिश कर रही है, वैसे ही लोकसभा में अपनी जवाबदेही से बचने की कोशिश कर रही है।
बीजेपी सरकार ने क्या जवाब दिया ?

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के सांसद दिनेश शर्मा ने Kumbh मेले की व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए दावा किया कि आयोजन बेहद सफल रहा।
उन्होंने कहा, अगर Kumbhकी व्यवस्थाएं उत्कृष्ट नहीं होतीं, तो इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालु सफलतापूर्वक यहां नहीं पहुंच पाते। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने Kumbh को बदनाम करने के लिए कई बयान दिए ताकि इसे असफल दिखाया जा सके।
दिनेश शर्मा ने आगे कहा, जो घटना हुई, वह दुर्भाग्यपूर्ण है, लेकिन इसकी असली वजह क्या थी, यह जांच का विषय है। भगदड़ स्वतः हुई या किसी ने इसे जानबूझकर कराया, यह स्पष्ट होना चाहिए। विपक्ष को इस दुखद घटना का राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश बंद करनी चाहिए।
प्रयागराज में मौनी अमावस्या के दिन, 29 जनवरी की रात करीब 2 बजे भगदड़ मच गई थी। उत्तर प्रदेश सरकार ने 30 लोगों के मारे जाने और 60 लोगों के घायल होने की पुष्टि की है।
हालांकि, विपक्षी दलों का दावा है कि मौनी अमावस्या के दिन प्रयागराज में दो अलग-अलग स्थानों पर भगदड़ हुई थी, और मृतकों की संख्या सरकार द्वारा बताए गए आंकड़ों से कहीं अधिक है।
खासतौर पर समाजवादी पार्टी ने उत्तर प्रदेश सरकार पर भगदड़ से जुड़े आंकड़ों को छिपाने का आरोप लगाया है।
समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने इस मुद्दे पर सरकार को लताड़ लगाते हुए कहा, महाकुंभ में जिन लोगों की जान गई, सरकार अभी भी उनकी सही गिनती छिपा रही है। प्रशासन करोड़ों श्रद्धालुओं के स्नान का आंकड़ा जारी कर सकता है, लेकिन मृतकों की संख्या क्यों नहीं बता पा रहा? कई परिवार अभी भी अपनों को ढूंढ रहे हैं।
हिन्दी मंगल टाइपिंग यहाँ सीखें



