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दिल्ली में खिला कमल, AAP का सूपड़ा साफ, वोटकटवा साबित हुई कांग्रेस, ओवैसी ने छोड़ी छाप।

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AAP
ऐसा माना जा रहा है कि अगर कांग्रेस और AAP का गठबंधन होता तो दिल्ली का चुनावी नतीजा कुछ और ही होता।

शनिवार, 8 फ़रवरी को दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजे घोषित हुए, जिसमें बीजेपी ने 27 साल बाद सत्ता में वापसी की।

दिल्ली की 70 विधानसभा सीटों में बीजेपी ने 48 सीटों पर जीत दर्ज कर बहुमत हासिल किया, जबकि अब तक सत्ता में रही आम आदमी पार्टी (AAP) केवल 22 सीटों पर सिमट गई।

वोट शेयर की बात करें तो बीजेपी को 45.56% वोट मिले, जबकि आम आदमी पार्टी (AAP) को 43.57% मत प्राप्त हुए।

कांग्रेस इस चुनाव में तीसरी प्रमुख पार्टी थी, लेकिन वह एक भी सीट जीतने में नाकाम रही। हालांकि, उसका वोट प्रतिशत 6.34% रहा, जो 2020 के चुनावों में मिले 4.63% वोटों की तुलना में बेहतर था।

इस बार के चुनाव में दिल्ली की कई ऐसी सीटें रहीं जहां कांग्रेस ने अप्रत्यक्ष रूप से आम आदमी पार्टी (AAP) की हार में भूमिका निभाई। इन सीटों पर बीजेपी की जीत का अंतर कांग्रेस को मिले वोटों से कम था।

2024 के लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (AAP) ने इंडिया गठबंधन के तहत मिलकर चुनाव लड़ा था।

हालांकि, दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले दोनों पार्टियों ने अलग-अलग चुनाव लड़ने का निर्णय लिया। चुनाव प्रचार के दौरान भी दोनों ने एक-दूसरे पर तीखे हमले किए और खूब तंज़ कसे।

लेकिन चुनावी नतीजों को देखने के बाद ऐसा प्रतीत होता है कि अगर कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (AAP) ने मिलकर चुनाव लड़ा होता और उनके वोट एकजुट होते, तो वे एक टीम के रूप में जीत हासिल कर सकते थे।

आइए नज़र डालते हैं उन 13 सीटों पर, जहां कांग्रेस वोटकटवा साबित हुई।

नई दिल्ली (40)

नई दिल्ली सीट से खुद दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) के संयोजक अरविंद केजरीवाल चुनावी मैदान में थे, लेकिन बीजेपी के प्रवेश साहिब सिंह ने उन्हें 4,089 वोटों से हराया।

केजरीवाल ने 2013 में दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को हराकर इस सीट पर जीत दर्ज की थी और लगातार तीन बार यहां से विधायक चुने गए।

उन्हें हराने वाले प्रवेश साहिब सिंह, दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री साहिब सिंह वर्मा के बेटे हैं और इससे पहले दो बार पश्चिमी दिल्ली से सांसद रह चुके हैं।

इस बार कांग्रेस ने इस सीट से शीला दीक्षित के बेटे संदीप दीक्षित को उम्मीदवार बनाया था, जिन्हें कुल 4,568 वोट मिले। यह संख्या जीत के अंतर से 479 वोट ज्यादा है।

जंगपुरा (41)
पूर्व शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदीया।

इस हाई प्रोफ़ाइल सीट से आम आदमी पार्टी (AAP) की ओर से दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया उम्मीदवार थे, लेकिन उन्हें मात्र 675 वोटों के अंतर से हार का सामना करना पड़ा।

यहां से बीजेपी के तरविंदर सिंह मारवाह ने जीत दर्ज की।

इस सीट पर कांग्रेस ने भी अहम भूमिका निभाई। उसके उम्मीदवार फ़रहाद सूरी को 7,350 वोट मिले, जो जीत के अंतर से कहीं ज्यादा थे।

मनीष सिसोदिया 2013 से लगातार तीन बार पटपड़गंज सीट से विधायक रहे, लेकिन इस बार उन्होंने अपनी सीट बदलने का फैसला किया।

आम आदमी पार्टी ने 2024 में पार्टी में शामिल हुए अवध ओझा को पटपड़गंज से टिकट दिया, लेकिन यह रणनीति न तो अवध ओझा के लिए फायदेमंद साबित हुई और न ही मनीष सिसोदिया के लिए।

बीते तीन चुनावों से जंगपुरा विधानसभा सीट आम आदमी पार्टी (AAP) के कब्जे में रही है। 2013 में मनिंदर सिंह धीर ने यहां से जीत दर्ज की थी, जबकि 2015 और 2020 में प्रवीण कुमार को जीत मिली।

इससे पहले, 1998 से 2008 तक लगातार तीन बार इस सीट से तरविंदर सिंह मारवाह विधायक रहे। हालांकि, उस समय वे कांग्रेस के नेता थे। 2022 में उन्होंने कांग्रेस छोड़कर बीजेपी का दामन थाम लिया था।

ग्रेटर कैलाश (50)

बीजेपी की शिखा रॉय ने यहां बेहद कम अंतर से जीत दर्ज की। उन्होंने आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता और मंत्री सौरभ भारद्वाज को 3,188 वोटों से हराया।

इस सीट पर कांग्रेस के उम्मीदवार गर्वित सिंघवी को कुल 6,711 वोट मिले। यदि ये वोट आम आदमी पार्टी (AAP) को मिलते, तो सौरभ भारद्वाज की जीत संभव थी।

सौरभ भारद्वाज लगातार तीन बार इस सीट से विधायक चुने गए थे, जबकि 2008 में यह सीट बीजेपी के पास थी।

त्रिलोकपुरी (55)

संगम विहार की तरह यह सीट भी उन क्षेत्रों में शामिल रही जहां बीजेपी ने बेहद कम अंतर से जीत दर्ज की।

इस सीट पर बीजेपी के रवि कांत ने महज 392 वोटों के अंतर से आम आदमी पार्टी (AAP) की अंजना पार्चा को हराया।

कांग्रेस की भूमिका यहां काफी अहम रही, क्योंकि उसके उम्मीदवार अमरदीप ने 6,147 वोट हासिल किए।

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2020 के विधानसभा चुनाव में इस सीट पर आम आदमी पार्टी (AAP) के रोहित कुमार महरौलिया ने बीजेपी की किरण वैद्य को हराकर जीत दर्ज की थी।

हालांकि, इस बार चुनाव से कुछ दिन पहले टिकट न मिलने से नाराज होकर उन्होंने आम आदमी पार्टी (AAP) से इस्तीफा दे दिया था।

संगम विहार (49)

इस सीट पर मुकाबला बेहद कांटे का रहा, जहां जीत का अंतर सिर्फ 344 वोटों का रहा, जो इस चुनाव में सबसे कम था।

बीजेपी के चंदन कुमार चौधरी ने कुल 54,049 वोट हासिल किए, जबकि आम आदमी पार्टी (AAP) के मौजूदा विधायक दिनेश मोहनिया उनसे मात्र 344 वोटों से पीछे रह गए।

दिनेश मोहनिया पिछले तीन चुनावों से इस सीट पर लगातार जीत दर्ज कर रहे थे, लेकिन इस बार उन्हें हार का सामना करना पड़ा।

इस सीट पर कांग्रेस की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही। उसके उम्मीदवार हर्ष चौधरी ने 15,863 वोट हासिल किए और तीसरे स्थान पर रहे।

तिमारपुर (3)

इस सीट पर कड़ा मुकाबला देखने को मिला, जहां बीजेपी ने 1,168 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की।

बीजेपी उम्मीदवार सूर्य प्रकाश खत्री ने कुल 55,941 वोट हासिल किए और आम आदमी पार्टी (AAP) के सुरिंदर पाल सिंह को हराया।

कांग्रेस के उम्मीदवार लोकेन्द्र कल्याण सिंह को इस सीट पर 8,361 वोट मिले।

2020 के विधानसभा चुनाव में यह सीट आम आदमी पार्टी (AAP) के दिलीप पांडे के खाते में गई थी। उस समय उन्होंने बीजेपी के प्रत्याशी सुरिंदर पाल सिंह को हराया था।

हालांकि, इस बार चुनाव से पहले दिसंबर में सुरिंदर पाल सिंह ने बीजेपी छोड़कर आम आदमी पार्टी का दामन थाम लिया। वहीं, दिलीप पांडे ने चुनाव न लड़ने का फैसला किया, जिसके बाद आम आदमी पार्टी (AAP) ने इस सीट से सुरिंदर पाल सिंह को टिकट दिया।

राजेन्द्र नगर (39)
दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 में बीजेपी के सबसे युवा विधायक भी बन गए हैं।

इस सीट पर बीजेपी ने केवल 1,231 वोटों के मामूली अंतर से जीत दर्ज की।

बीजेपी के उमंग बजाज, जो दिल्ली म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन में काउंसिलर रह चुके हैं, उन्होने आम आदमी पार्टी के मौजूदा विधायक दुर्गेश पाठक को हराया।

कांग्रेस के उम्मीदवार विनीत यादव, जो पहली बार चुनावी मैदान में उतरे थे, उनको इस सीट पर कुल 4,015 वोट मिले।

2020 के विधानसभा चुनाव में इस सीट से राघव चड्ढा विजयी हुए थे। बाद में, 2022 में पार्टी ने उन्हें राज्यसभा भेज दिया, जिससे यह सीट खाली हो गई।

इसके बाद उपचुनाव में आम आदमी पार्टी (AAP) ने दुर्गेश पाठक को उम्मीदवार बनाया, जिन्होंने जीत दर्ज कर पार्टी का कब्जा बरकरार रखा था।

मेहरौली (45)

दक्षिणी दिल्ली की इस सीट पर बीजेपी के गजेन्द्र सिंह यादव ने 1,782 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की। उन्होंने आम आदमी पार्टी के महेंद्र चौधरी को पटखनी दी।

इस सीट पर कांग्रेस की उम्मीदवार पुष्पा सिंह और निर्दलीय प्रत्याशी बालयोगी बाबा बालकनाथ ने अहम भूमिका निभाई। बालकनाथ को 9,731 वोट मिले, जबकि पुष्पा सिंह 9,338 वोटों के साथ चौथे स्थान पर रहीं।

इस सीट से आम आदमी पार्टी (AAP) के नरेश यादव 2015 और 2020 में विधायक चुने गए थे। हालांकि, इस बार चुनाव से ठीक पहले, 31 जनवरी 2025 को उन्होंने पार्टी से इस्तीफा दे दिया।

मालवीय नगर (43)

आम आदमी पार्टी सरकार में मंत्री रहे सोमनाथ भारती को इस सीट पर हार का सामना करना पड़ा। उन्हें बीजेपी के सतीश उपाध्याय ने 2,131 वोटों के अंतर से हराया।

सतीश उपाध्याय 2014 और 2016 के दौरान दिल्ली बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं।

इस सीट पर कांग्रेस के उम्मीदवार जीतेंद्र कुमार कोचर को 6,770 वोट मिले।

सोमनाथ भारती ने 2013 में इसी सीट से कांग्रेस की विधायक किरण वालिया को हराकर पहली बार जीत दर्ज की थी। इसके बाद उन्होंने 2015 और 2020 में भी यहां से जीत हासिल की थी।

छतरपुर (46)

यह सीट 6,239 वोटों के अंतर से बीजेपी के खाते में गई। बीजेपी के करतार सिंह तंवर को कुल 80,469 वोट मिले, जबकि आम आदमी पार्टी (AAP) के ब्रह्म सिंह तंवर उनसे सिर्फ 6,239 वोटों से पीछे रह गए।

इस सीट पर कांग्रेस के राजेंद्र सिंह तंवर को 6,601 वोट हासिल हुए।

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करतार सिंह तंवर 2015 से लगातार इस सीट से जीतते आ रहे हैं। 2015 और 2020 में उन्होंने आम आदमी पार्टी (AAP) के उम्मीदवार के रूप में चुनाव जीता था। हालांकि, पिछले साल उन्होंने पार्टी छोड़कर बीजेपी का दामन थाम लिया।

इस बार उन्होंने बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ा और एक बार फिर इस सीट पर जीत दर्ज की।

मादीपुर (26)

इस सीट पर बीजेपी ने कब्जा जमाया, जहां से कैलाश गंगवाल ने 10,899 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की। उन्होंने आम आदमी पार्टी की राखी बिड़लान को हराया, जबकि कांग्रेस के जेपी पंवार को 17,958 वोट मिले।

 1998, 2003 और 2008 में यह सीट लगातार कांग्रेस के पास थी, लेकिन 2013 में आम आदमी पार्टी ने यहां अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई।

 तीन बार इस सीट से आम आदमी पार्टी के गिरीश सोनी विधायक बने, मगर इस बार पार्टी ने उम्मीदवार बदलते हुए राखी बिड़लान को टिकट दिया, जो पहले मंगोलपुरी से तीन बार विधायक रह चुकी हैं। 

हालांकि, पार्टी के इस फैसले का उल्टा असर पड़ा और इस बार आम आदमी पार्टी (AAP) को हार का सामना करना पड़ा।

बादली (5)

इस सीट पर बीजेपी ने 15,163 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की। बीजेपी उम्मीदवार अहिर दीपक चौधरी ने आम आदमी पार्टी के अजेश यादव को हराया।

इस परिणाम में दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष देवेन्द्र यादव की भूमिका महत्वपूर्ण रही, जो यहां से कांग्रेस के उम्मीदवार थे। वह तीसरे स्थान पर रहे और उन्हें कुल 41,017 वोट मिले, जो अजेश यादव से सिर्फ 4,958 कम थे।

अजेश यादव 2008 में बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर इसी सीट से चुनाव लड़ चुके थे, लेकिन हार गए। बाद में उन्होंने कांग्रेस का रुख किया और फिर आम आदमी पार्टी (AAP) में शामिल हो गए।

2015 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के देवेन्द्र यादव को हराकर जीत हासिल की थी।

नांगलोई जाट (11)

बीजेपी के मनोज कुमार शौकीन ने पश्चिमी दिल्ली की इस सीट पर 26,251 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की, जहां उन्होंने आम आदमी पार्टी के रघुविन्दर शौकीन को हराया।

कांग्रेस के उम्मीदवार रोहित चौधरी को 32,028 वोट मिले, जो बीजेपी की जीत में अहम वजह साबित हुआ।

इससे पहले, रघुविन्दर शौकीन लगातार दो बार इस सीट से आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक रह चुके थे।

मनोज शौकीन की यह जीत उनकी राजनीतिक वापसी मानी जा रही है, क्योंकि वह 2013 से 2014 तक इसी सीट से विधायक रह चुके थे। इससे पहले, वह मुंडका सीट से भी विधायक रह चुके हैं।

दिल्ली की वो 2 सीटे जहां ओवैसी की पार्टी ने छोड़ी छाप

दिल्ली चुनाव के दौरान असदुद्दीन ओवैसी एक सभा को संबोधित करते हुए।
ओखला

दिल्ली विधानसभा चुनाव में चर्चा में रही ओखला सीट पर आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता अमानतुल्लाह खान ने जीत हासिल की। यह उनकी लगातार तीसरी जीत है। उन्होंने बीजेपी के मनीष चौधरी को 23,639 वोटों के अंतर से हराया। खान को कुल 88,943 वोट मिले, जबकि चौधरी को 65,304 वोट प्राप्त हुए।

इस सीट पर असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम ने भी जोरदार मुकाबला किया। उनके उम्मीदवार शिफा उर रहमान को 39,558 वोट मिले। कांग्रेस उम्मीदवार अरीबा खान चौथे स्थान पर रहीं और उन्हें सिर्फ 12,739 वोटों पर ही संतोष करना पड़ा।

शिफा उर रहमान दिल्ली दंगों के मामले में आरोपी हैं और वर्तमान में तिहाड़ जेल में बंद हैं। उन्हें विधानसभा चुनाव प्रचार के लिए कोर्ट से कस्टडी परोल मिली थी। इस दौरान, उन्होंने असदुद्दीन ओवैसी और एआईएमआईएम के अन्य नेताओं के साथ ओखला में कई रोड शो किए।

मुस्तफाबाद
चुनाव प्रचार के दौरान ताहिर हुसैन।

इस सीट पर असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम ने दिल्ली दंगों के आरोपी ताहिर हुसैन को उम्मीदवार बनाया था। इसे लेकर चर्चा थी कि उनकी उम्मीदवारी आम आदमी पार्टी के चुनावी गणित को प्रभावित कर सकती है।

चुनाव नतीजे आने के बाद यह अनुमान काफी हद तक सही साबित हुआ। मुस्तफ़ाबाद सीट से बीजेपी के उम्मीदवार मोहन सिंह बिष्ट ने आम आदमी पार्टी (AAP) के आदिल अहमद खान को 17,578 वोटों के अंतर से हराया।

दिलचस्प रूप से, ताहिर हुसैन 33,474 वोट हासिल कर तीसरे स्थान पर रहे, जबकि कांग्रेस के अली मेहदी केवल 11,763 वोटों के साथ चौथे स्थान पर रहे।

अगर वोट प्रतिशत की बात करें तो:

  • बीजेपी के मोहन सिंह बिष्ट को 42.36% वोट मिले,
  • आम आदमी पार्टी के आदिल अहमद खान को 33.62% वोट मिले,
  • जबकि एआईएमआईएम के ताहिर हुसैन को 16.64% वोट प्राप्त हुए।

यानी भले ही ताहिर हुसैन चुनाव नहीं जीत पाए, लेकिन उन्होंने ठीक ठाक संख्या में वोट हासिल किए।

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